iphone का प्राइस इंडिया में इतना अधिक क्यों होता है ?

iphone का प्राइस इंडिया में इतना अधिक क्यों होता है. ये प्रश्न सभी के लिए कॉमन है. जब यही iphone को दूसरे देश या अमेरिका में खरीदते हैं तो इंडिया के कंपेयर में अधिक क्यों होता है ? खैर, अब इंडिया में भी प्राइस कम होगा . आखिर कैसे होगा ? इसके लिए आगे पढ़िए.

कोई मोबाइल बहुत ही सस्ता होता है. लेकिन same इसी प्रकार के same फ़ीचर्स वाले मोबाइल की कीमत में बहुत अंतर होता है. आपने कभी सोचा है ! ऐसा क्यों होता है ? इसमें बहुत सारे फैक्टर काम करता है.

एक मोबाइल में बहुत सारे पार्ट्स लगा रहता है. जैसे प्रोसेसर, सेंसर, बैटरी, कवर,गिलास,चार्जर, इत्यादि. आपको बता दें कि ये सभी चीजों का मैन्युफैक्चरिंग एक जगह या एक देश में नहीं होता है.

इसलिए कंपनी को अलग-अलग देश से मांगना पड़ता है.जिससे उसका प्राइस बढ़ जाता है. फिर मोबाइल को असेम्बल करने के लिए भी कहीं दूसरे जगह करता है. इसलिए मोबाइल का प्राइस बढ़ जाता है.

जैसे अमेरिका में कोई भी चीन मैनुफैक्चरिंग होगा तो उसका प्राइस दूसरे देश आते -आते बहुत बढ़ जाएगा . इसका क्या कारण है ? अमेरिका में मजदूरी कॉस्ट बहुत ज्यादा है. फिर दूसरे देश तक आने में बहुत सारे टैक्स से भी गुजरना पड़ता है.

Mobile battery and processor को कितने बार चार्ज करने पर डेड हो जाता है ?

iphone की कीमत अमेरिका से 10000 से 15000 मंहगा होता है इंडिया में. इसलिए apple बहुत सारे iphone का निर्माण अब इंडिया में ही करना चाह रही है ताकि प्राइस कम किया जा सके.

इसमें ग्राहक को फायदा पहुँचता है. जो अच्छी बात है.आपको बता दें कि कस्टम ड्यूटी 12 प्रतिशत के लगभग पड़ता है.

अगर मोबाइल का सही प्राइस 30000 रुपैया है . तो यहाँ आने के बाद 30000+3600 रुपैया पड़ता है. मतलब 30000 का मोबाइल 33600 रुपैया में मिलेगा. यही बात एप्पल मोबाइल पर भी हो रही थी.

इसलिए apple ने इंडिया में दो मोबाइल का मैन्युफैक्चरिंग करने लगी है. आगे चल कर iphone का प्राइस और भी घट सकता है.

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