Mobile की बैटरी और प्रोसेसर कब डेड हो जाता है

जब आप कोई मोबाइल लेते हैं. तो सबसे पहले प्रोसेसर और बैटरी देखते हैं. क्या आप एक बार भी सोचते हैं कि मोबाइल का बैटरी और प्रोसेसर डेड (स्पीड कम या पूरी तरह से खत्म ) भी हो सकता है ?

क्या आप ये सोचते हैं . कि बेस्ट प्रॉसेसर है, तो बेस्ट परफॉर्मेंस भी मिलेगा ? या फिर बैटरी बड़ी है तो अच्छा बैकअप भी मिलेगा ?

इसका फायदा तो जरूर मिलता है. लेकिन आपको एक बात समझनी पड़ेगी की कम पावर वाला बैटरी भी ज्यादा बैकअप देता है. साथ में कम क्लॉक स्पीड वाला प्रॉसेसर का भी परफॉर्मेंस बहुत ही अच्छा होता है.

आज के पोस्ट में हम इसी पर बात करेंगे और एक ज्ञानवर्धक जानकारी भी देगें.

Mobile battery को कितने बार चार्ज करने पर डेड हो जाता है ?

एक कोई मोबाइल का बैटरी लीजिए और सोचिए आखिर इसके अंदर क्या रहता है. या तो कुछ तरल रासायनिक पदार्थ रहता है. या फिर कोई सूखा रासयनिक पदार्थ रहता है.

Mobile battery को कितने बार चार्ज करने पर डेड हो जाता है ?
Mobile battery को कितने बार चार्ज करने पर डेड हो जाता है ?

बैटरी चार्ज कैसे होता है ?

जब आप एक बार चार्ज करते हैं तो ये पदार्थ एक्टिव होता है. जब आप मोबाइल यूज़ करते हैं तो इस पदार्थ का कुछ भाग दूसरे पदार्थ में कन्वर्ट हो जाता है. जो कि फिर से अपने सही रूप में नहीं आता.

इसी तरह आप जितनी बार बैटरी को चार्ज करते हैं . उतनी बार कुछ पदार्थ का अंश दूसरे पदार्थ में कन्वर्ट होते जाता है.

कुछ समय बाद धीरे – धीरे वह पदार्थ पूरी तरह से दूसरे पदार्थ में कन्वर्ट हो जाता है. अब आपके मोबाइल में वह पदार्थ ही नहीं रहता है जो चार्ज हो . तब आपका बैटरी पूरी तरह डेड हो जाता है.

उदाहरण

जैसे कोई LED बिजली बल्ब खरीदते हैं. तो उसके डब्बे पर लिखा रहता है कि यह बल्ब कितने घंटे चलेगा. हो सकता है लिखा रहें 180 घंटे चलेगा.

इसका मतलब आप कैलकुलेट कर सकते हैं कि अगर हम इस बल्ब को 1 घंटा रोज जलता हूँ . तो यह 180 दिन चलेगा. फिर इसमें जो पदार्थ दिया गया है उसको फिर से लगा दूँ तो फिर वह 180 घंटे चलेगा.

बैटरी की उम्र

इसी तरह बैटरी में भी होता है. अगर बैटरी का उम्र निर्धारित होता है. कि कितनी बार इसे चार्ज किया जा सकता है. मतलब किसी बैटरी की उम्र 1000 है. तो आप 1000 बार इसको चार्ज कर सकते हैं.

वैसे कंपनियों की माने तो , उनका कहना है . एक mobile battery को 300 से 500 बार चार्ज किया जा सकता है. उसके बाद बैटरी की कैपिसिटी घटने लगती है. इसका मतलब यह नहीं है कि 300 से 500 बार चार्ज करने पर आपका mobile battery डेड हो जाता है.

अब आप सोचिए अगर एक दिन में दो बार चार्ज करते हैं तो यह बैटरी 500 दिन तक चलेगा.

Mobile processor की प्रोसेसिंग पावर कब डाउन होने लगती है ?

Mobile processor की प्रोसेसिंग पावर कब डाउन होने लगती है ?
https://en.m.wikipedia.org/wiki/Baseband_processor

इसी तरह प्रोसेसर में भी होता है. सभी प्रोसेसर का उम्र निर्धारित रहता है. एक बार में अधिकतम कितनी क्लॉक स्पीड हो सकता है किसी प्रोसेसर का यह निर्धारित रहता है. और ये भी निर्धारित रहता है कि कितना डेटा हो ये प्रोसेस कर सकता है यह अपनी पूरी जिंदगी में.

जैसे बैटरी में होता है. उसी तरह प्रोसेसर में भी होता है. उसके बाद आपका प्रोसेसर स्पीड स्लो हो जाता है.

साथ में और दूसरे चीज़ का भी परफॉर्मेंस डाउन होता है. अब बात आती है कि आखिर किस तरह का मोबाइल ले कि ये सब प्रॉब्लम न आये.

प्रॉसेसर स्लो काम क्यों करता है ?

जब आप कोई मोबाइल खरीदते हैं तो वह एक ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन करता है. हो सकता है, एंड्राइड और मोबाइल कंपनी का कस्टम ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ हो.

ये भी हो सकता है सिर्फ एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम ही हो. या कोई दूसरा ऑपरेटिंग सिस्टम हो जैसे ios. यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि ज्यादा ऑपरेटिंग सिस्टम मतलब ज्यादा डेटा आपके मोबाइल में , अगर ज्यादा डेटा रहेगा तो प्रोसेसर पर ज्यादा लोड पड़ेगा.

और प्रोसेसर और बैटरी का उम्र कम हो जाएगा. इसी तरफ अगर बहुत कम डेटा वाला ऑपरेटिंग सिस्टम आपके मोबाइल में रहेगा तो आपके मोबाइल के प्रोसेसर और बैटरी का उम्र बढ़ जाएगा.

क्योंकि उसे ज्यादा डेटा को प्रोसेस नहीं करना पड़ेगा. इसी तरह आप कोई मोबाइल में हैवी गेम खलते हैं तो आपके मोबाइल में हरेक चीज़ का परफॉर्मेंस घट जाता है.

कौन सा मोबाइल खरीदे की ये प्रॉब्लम न आये ?

अभी के समय में जहाँ तक मैं अनुभव किया हूँ . अगर आप xiaomi का मोबाइल लेंगे तो उसमें ज्यादा डेटा वाला ऑपरेटिंग सिस्टम दिया जाता है.

इसके बाद realme और ओप्पो का नंबर आता है. उसके बाद वीवो का नंबर आता है.samsung में भी कस्टम ऑपरेटिंग सिस्टम दिया जाता है.

लेकिन samsung का हल्का रहता है इनकी तुलना में. नोकिया का सबसे अधिक हल्का आता है. कोई भी गूगल फ़ोन्स हो या कोई सिर्फ एंड्राइड पर चलने वाला मोबाइल उसका ऑपरेटिंग सिस्टम हल्का आता है.

Apple का ios की बात करें तो उसमें कस्टम कुछ भी नहीं रहता है.वह बहुत ही ऑप्टिमज़ भी रहता है और हल्का भी.

Mobile battery and processor में बहुत भिन्नता है. जैसे mobile battery डेड होता है. उस तरह processor डेड नहीं होता. लेकिन थोड़ा बहुत समय के साथ प्रोसेसिंग पावर डाउन हो जाता है.

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